Ayurved For Health

Day to Day Fight With Cancer

आजकल सब्जियां पेस्टीसाइड्स से लबालब है। मार्केट में मिलने वाले गेहूं के आटे में पेस्टीसाइड्स है, चिप्स कुरकुरे में अजीनोमोटो है, तो मैगी जैसे साधारण दिखनेवाली सेवइयों में भी lead जैसे घातक रसायनों की मात्रा अत्याधिक रूप में है। द्राक्ष के गुच्छों पर तो फव्वारे हुए पेस्टीसाइड्स के लेयर स्पष्ट रूप से दिखते है। कच्चे केलों और आम को पकाने के लिए कार्बाइड्स का उपयोग किसी से छुपा नहीं है और कार्बाइड्स कैंसर निर्माण कर सकते है यह रिसर्च भी सब जानते है।

तला हुआ खाने से अथवा बाहर का अधिक टेम्परेचर पर बना हुआ खाने से acrylamide नाम का कैंसर उत्पन्न करनेवाला रसायन, आपकी इच्छा हो या ना हो, पेट में जाता ही है। कही न कही मजबूरी से ही सही, ऐसा पानी पीने में आता है जो infected हो या केवल गंदगी से दूषित हो। बाहर जाने के बाद घर का खाना नहीं मिलता, ऐसे वक्त आप भले एल्युमिनियम के बर्तन में बना खाना घर पर ना खाते हो, पर बाहर ना चाहते हुए भी आपको खाना ही पड़ता है। रोज ना चाहते हुए भी ऐसा दूषिविष (slow poison) पेट में जाता ही है और आज ऐसी परिस्थिति है, की आप कितना भी नियमों को फॉलो करें केमिकल किसी न किसी रूप में पेट में जाता ही है।

खाने पीने का क्या कम था, तो आजकल कुछ वैक्सीन से भी कैंसर उत्पन्न होने की संभावनाओं की चर्चा है। मतलब अगर आपने कैंसर निर्माण करनेवाले कारणों पर सीरियसली विचार विमर्श करके इनसे बचने के कुछ उपाय नहीं किए, तो समझिए कि कैंसर होने की संभावना अधिक है और आजकल हम अनेकों बार रुग्ण के मुँह से यह सुन चुके है कि मुझे तो सौंफ खाने का भी व्यसन नहीं था, तो फिर मुझे कैंसर क्यों हुआ?तो इस प्रश्न का उत्तर, उपरोक्त चर्चा में है। यूं मानिए कि आज कैंसर आपके द्वार पर ही खड़ा है, बस आपसे थोड़ी लापरवाही की देर है कि कैंसर निर्माण होना ही है।

तो इससे बचने के क्या उपाय है?

  1. हर 2 महीने में 1 बार स्वामीआयुर्वेद सिद्ध एरंड तेल से सद्योविरेचन करे अर्थात पेट साफ करे। सिद्ध एरंड तेल से सद्योविरेचन करवाने की पूर्ण प्रक्रिया स्वामीआयुर्वेद की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
  2. रोज सुबह गुड़ूची अर्क 20 मिली + सुरभि जल 20 मिली खाली पेट लिया करे। गुड़ूची अर्क और सुरभि जल का मिश्रण उत्तम दूषिविषहर है। इतना ही नहीं यह बुखार के सभी प्रकारों उत्तम रूप से लाभदायी है। इम्युनिटी को सबल, सजग रखता है। उत्तम पित्तशामक है, अर्थात एसिडिटी दूर करता है। मतलब जाने अनजाने में यदि कुछ खाने में आया तो भी गुड़ूची अर्क और सुरभि जल का मिश्रण उससे होनेवाली हानी से अवश्य बचाता है।

प्यास लगने पर कुआं खोदने से अच्छा है कि पहले से ही यह काम कर लेना चाहिए। इसलिए आहारजन्य इन दूषिविषों से शरीर में कोई बड़ा रोग निर्माण हो, इससे पहले उसे निष्प्रभावी कर देना ही समझदारी का काम है और गुड़ूची अर्क और सुरभि जल यह काम बहुत ही बढ़िया तरीके के करता है, इसमें कोई 2 राय नहीं।

लेखक
वैद्य सोमराज मधुकर खर्चे
एम डी, पीएचडी (आयुर्वेद)
स्वामीआयुर्वेद
श्री स्वामी समर्थ आयुर्वेद सेवा प्रतिष्ठान, खामगांव, महाराष्ट्र, भारत

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