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Successful Fever Management with Ayurved

क्या कोई भी बुखार केवल 24 घंटों में ठीक हो सकता है?

अभी वायरल फीवर (viral fever) का सीजन शुरू हो गया है। वैसे तो आजकल वायरल फीवर पूरे साल भर चलता ही रहता है। परंतु वर्षा ऋतु (जून, जुलाई, अगस्त) और इसके बाद आनेवाले शरद ऋतु (सितंबर, अक्टूबर) में इसका प्रकोप अधिक रहता है। वायरल के साथ टाइफाइड, मलेरिया, डेंगू, चिकन गुनिया ये सब भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहते है। परंतु वायरल फीवर के ही चपेट में ज्यादातर लोग आ जाते है। वायरल फीवर अलग अलग लक्षणों के साथ उत्पन्न होते दिखाई पड़ता है जैसे अत्याधिक थकान लगना (extreme weakness), अत्याधिक सरदर्द, पूरा शरीर सतत टूटता रहता है (अंगड़ाईया, Prostration), खाने से मन उठ जाता है (anorexia) और आजकल इन लक्षणों की विशेषता यह है कि ये अपनी पूरी ताकत के साथ उत्पन्न होते है इसलिए वायरल इन्फेक्शन होते से ही 1 या 2 घंटे के अंदर अंदर व्यक्ति अधमरा सा हो जाता है। कोई काम करने की इच्छा नहीं होती अथवा किसी भी काम में मन नहीं लगता। ऐसी अवस्था में भारत के 90% लोग सबसे पहले पैरासिटामोल का सहारा लेते है और लेते से ही थोड़ा आराम मिलता है (कई रुग्णों में तो यह भी देखा गया है कि उनको पैरासिटामोल से रत्तीभर भी आराम नहीं होता) परन्तु यह आराम चिरस्थाई नहीं होता। तुरंत 4 घंटे के बाद फिर से बुखार आ ही जाता है और सभी लक्षण पहले से अधिक बलवान होकर पेशेंट फिर से बेड पकड़ लेता है। अब पेशंट या तो नजदीकी डॉक्टर को दिखा देता है या फिर खुद ही एजीथ्रोमाइसिन लेना शुरू कर देता है। (क्योंकि Azithromycin यह आजकल OTC मेडिसिन जैसा हो चूका है। लोग बिना डॉक्टर की सलाह से ही शुरू कर देते है, जो कि पूर्णतः गलत है) फिर यह सिलसिला 7 से 8 दिन तक चलता है। फिर भी पूरा आराम तो नहीं ही होता। इसमें भी पेशेंट अगर छोटा बच्चा है तो मां बाप दिन रात उसकी सेवा में लगे रहते है और कुछ मां बाप तो पैनिक मोड में आकर बच्चे को एडमिट ही कर देते है।

अब ये आठ दिन तक का बुखार शारीरिक और आर्थिक दृष्टि से रुग्ण को अत्याधिक कमजोर बना देता है, औषधि लेने के बावजूद भी। और फिर घर में कोई एक व्यक्ति बीमार है, तो पूरा घर उसके इर्द गिर्द घूमता रहता है वो अलग ही बात है। उसका कही कोई हिसाब किताब नहीं होता।
परंतु समझिए कि इसी अवस्था को अगर आप केवल 3 से 4 दिन में आराम से निपटे तो कैसा रहेगा? और वो भी बिना किसी अधिक शारीरिक, आर्थिक या मानसिक हानी के!

जी हां, यह पूर्णतः संभव है। केवल आवश्यकता है, दिया हुआ कोर्स प्रामाणिक रूप से समय सीमा के अंदर पूर्ण करने की…

स्वामीआयुर्वेद गुड़ूची अर्क और स्वामीआयुर्वेद सुरभि जल दोनो औषधियों को 20-20 मिली की मात्रा एक कप में मिश्रित करके हर घंटे पीना चाहिए। मतलब सुबह 6, 7 या 8 बजे से लाकर शाम को 6, 7 या 8 बजे तक प्रत्येक घंटे के बाद पीना चाहिए। इसे लोडिंग डोस कहते है। लोडिंग डोस लेने के पहले दिन कोई खास फर्क नहीं दिखाई देता। ऐसे लगता है मानो दवा पूर्णतः बेअसर है, लेकिन रात को जैसे ही पेशंट सोता है और सुबह उठता है। सब कुछ एकदम गायब। पेशंट एकदम तरोताजा (fresh) अनुभव करता है, मानो कोई बुखार वगैरा था ही नहीं। 75% पेशंट में ऐसा सकारात्मक अनुभव आता है। 20% पेशंट में औषधि का लोडिंग डोस दूसरे भी दिन चालू रखना पड़ता है, हालांकि पहले दिन से बहुत हद तक लाभ होता है। बुखार, कमजोरी, भूख न लगना इन सभी लक्षणों में भी लाभ दिखाई देता है और पेशंट 2 ही दिन में ज्वरमुक्त हो जाता है। 5% पेशंट में 3 से 4 दिन तक लोडिंग डोस चालू रखना पड़ता है और दिन प्रतिदिन उनमें भी शारीरिक एवं मानसिक स्तर पर सुधार देखने को मिलता है। 4 दिन से अधिक ये औषधियां किसी को लेने की आजतक आवश्यकता नहीं पड़ी, बुखार निश्चित रूप से चला जाता ही है।
ये दोनो औषधियाँ नवजात शिशु से लेकर 100 वर्ष के वृद्धों तक बिन दिक्कत दी जा सकती है। सगर्भा माताओं में भी बिंदास दी जा सकती है। नवजात शिशुओं को ड्रॉप्स के रूप में देना चाहिए, 1 साल के शिशु को 2-2 मिली, 2 से 4 साल के बच्चों को 10 – 10 मिली, 5 से 10 साल तक के बच्चों में 15 – 15 मिली और 11 वे वर्ष से आगे पूर्ण मात्रा -20 – 20 मिली दी जा सकती है।
इसलिए अब वायरल या अन्य किसी भी प्रकार का फीवर (ज्वर, बुखार) आए तो घबराना नहीं और उपरोक्त औषधि का विश्वासपूर्वक सेवन कीजिए और शीघ्र ही आरोग्यप्राप्ति कीजिए।

लेखक
वैद्य सोमराज मधुकर खर्चे
एम. डी. पी.एचडी. (आयुर्वेद)

©SwamiAyurved Retail

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